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घर में बरकत के लिए अपनाएं ये वास्तु टिप्स..

Vastu Rashifal

घर में बरकत के लिए अपनाएं ये वास्तु टिप्स..

घर में बरकत के लिए अपनाएं ये वास्तु टिप्स..

 

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हर व्यक्ति चाहता है की उसके घर परिवार  में हर समय सुख शान्ति और समृधि  रहे ! इसके लिये वह अपने व्यापार या नौकरी में जी -जान से मेहनत करता है, पूजा पाठ करता है तीर्थ यात्रा करता है. पर फिर भी उसे उतनी समृद्धि नहीं मिलती न ही माता लक्ष्मी की वैसी कृपा उस पर बरसाती है जैसी वह चाहता है? इस कमी के लिए कौन से वे कारण हो सकते हैं जो धन और समृद्धि के मार्ग में बाधक बनते हैं ?

वैसे तो भारतीय दर्शन और आध्यात्म इस स्थिति के लिए मनुष्य के प्रारब्ध (पूर्व जन्मों के कार्य), इस जन्म के कर्म और उसके घर तथा कार्यस्थल के वास्तु  को इसके लिए जिम्मेदार मानता है, पर किसी को भी अपने प्रारब्ध की न तो जानकारी होती है न ही उसमें कुछ परिवर्तन संभव है न ही इस जन्म के कर्म को वो बदल सकता है अत: हम अपना ध्यान उसके घर तथा कार्यस्थल के वास्तु पर केन्द्रित करेंगे जहां कुछ सुधार करने से परिस्थितियों को बदलना संभव है!

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हिन्दू मान्यताओं के अनुसार धन की प्राप्ति के लिए माता लक्ष्मी का आशीर्वाद तथा स्थायी संपत्ति और समृद्धि के लिए भगवान कुबेर की कृपा का मिलना आवश्यक होता है. अत: हमें वास्तु के उन बिन्दुओं को देखना और सुधारना होगा जो घर एवं कार्य स्थल में इनके आशीर्वाद प्राप्त करने लायक स्थितियां निर्मित कर सकें?

  • घर का मुख्य द्वार का उत्तर या पूर्व मे होना सबसे अच्छा माना जाता है! विचारणीय बात ये है की वास्तु शास्त्र में  उत्तर दिशा को कुबेर का स्थान माना जाता है.
  • घर की उत्तर व पूर्व दिशाओं मे खुला स्थान छोड़ा जाना चाहिए, खिडकियाँ व दरवाजे भी इन्हीं दिशाओं में ज्यादा होना घर में लक्ष्मी प्रवेश के लिहाज़ से अति उत्तम होता है. इससे मन और शरीर में धनात्मक ऊर्जा का संचार भी होगा
  •  घर की उत्तर या उत्तर पूर्व दिशा में फव्वारा या एक्वेरियम रखें. इससे परिवार की समृद्धि में  वृद्धि होती है.
  •  सुबह के समय पूर्व और उत्तर की खिड़कियां खोलकर रखें, ताकि घर में सूर्य की किरणें आती रहें.
  •   पूजा घर पूर्व-उत्तर (ईशान कोण) में होना चाहिए पूजा हमेशा पूर्व या उत्तर की ओर मुंह कर बैठकर ही करनी चाहिए. (पूजा का सर्वोत्तम समय सुबह 6 से 8 के बीच का होता है).
  •  कुआँ, ट्यूब वेल, भूमिगत पानी की टंकी का निर्माण ईशान, उत्तर या पूर्व दिशा में डायगोनल (त्रिज्या) लाइन को छोडक़र किया जाना चाहिए.
  •  गृह स्वामी के जीवन मे समृद्धि, स्वास्थ, तथा एक धनात्मक स्थायित्व लाने के लिए उसका शयन कक्ष दक्षिण-पश्चिम में होना आवश्यक है. कार्य स्थल पर इसी सिद्धांत के अनुसार अपनी बैठक रखनी चाहिए साथ में यह ध्यान भी रखा जाना चाहिए कि, कार्य स्थल में बैठते समय मुंह उत्तर, पूर्व या ईशान दिशा की तरफ होना चाहिए.
  •  गृह स्वामी को अपनी तिजोरी (या वो अलमारी जिसमें घर की धन संपत्ति रखी जाती है) इस तरह रखनी चाहिए कि उसका द्वार हमेशा उत्तर याने कुबेर की दिशा में खुले.
  •   किचन (रसोई घर) दक्षिण-पूर्व मे इस तरह बनाएं की भोजन पकाते समय गृहणी का मुंह पूर्व की ओर रहे, अच्छा हो की   पूर्व दिशा में खिडक़ी भी हो.
  •  संपत्ति की सुरक्षा तथा परिवार की समृद्धि के लिए शौचालय, स्नानागार आदि उत्तर-पश्चिम के कोने में बनाएं जाने  चाहिए.
  •   कारोबार में अकाउंट तथा रोकड़ (कैश) विभाग उत्तर दिशा में बनाना चाहिए.
  •   घर के बीच का स्थान (जो की वास्तु शास्त्र में ब्रम्हस्थान कहलाता है) को साफ़-सुथरा रखा जाना चाहिए.
  •   पूजास्थल में अभिमंत्रित श्रीयंत्र तथा दाहिनावर्ती शंख स्थापित कर पूजन करने से घर में समृद्धि रुपी माता लक्ष्मी का      प्रवेश होता है.
  •   सामान्यत: घरों में श्री गणेश व लक्ष्मी जी की मूर्तियों की पूजा होती है किन्तु घर में विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी        की पूजा संयुक्त रूप से होनी चाहिए.
  •   संध्याकाल / गोधूली बेला को कुबेर का समय भी कहते हैं इस समय घर में अग्निहोत्र करने या केवल गुग्गल और धूप और कपूर का धुआँ करने से घर में समृद्धि आती है.
  •      संध्या काल में तुलसी और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से भी घर में समृद्धि आती है.
  •    शाम के समय में घर के द्वार पर रौशनी होनी ही चाहिए भगवान कुबेर के इस समय में द्वार पर अन्धेरा रहने से             लक्ष्मी रूष्ट हो जातीं हैं.
  •     झाड़ू को व्यवस्थित रूप से किसी नियत स्थान पर लेटाकर, आने-जाने वालों से छिपाकर रखें. कई समाजों में झाड़ू         की पूजा करने की भी परंपरा है.

वास्तव में झाड़ू ऋणात्मक उर्जा को घर से बाहर कर धनात्मक उर्जा का प्रवाह घर में बढ़ाती है अत: इसे लक्ष्मी के घर में प्रवेश कराने के एक मुख्य  श्रोत के रूप में वास्तु में स्थान दिया जाता है.

 

क्या न करें

  •             घर के उत्तर पूर्व में टॉयलेट न बनवाएं.
  •              घर के उत्तर पूर्व (ईशान) या उत्तर में सेप्टिक टैंक न बनाएं इसका सही स्थान वायव्य याने उत्तर-पश्चिम में                   होता है.
  •             दक्षिण-पश्चिम में किसी भी तरह का गड्ढा, सेप्टिक टैंक, ट्यूब वेल, भूमिगत पानी की टंकी आदि नहीं बनाई                 जानी चाहिए. इस दिशा मे घर सबसे उंचा होना चाहिए.
  •            घर के अहाते में कंटीले या जहरीले पेड़ जैसे बबूल, कैकटस आदि नहीं होने चाहिए, इनसे असुरक्षा की भावना                   आती है.
  •            कोर्ट केस आदि से संबंधित कागजों को तिजोरी, पैसों वाली अलमारी आदि में नहीं रखें, अन्यथा काफी ज्यादा

धन मुदमेबाजी में खर्च हो जाएगा.

  •            जूते चप्पलों के साथ ऋणात्मक उर्जा घर में आती है अत: इनका घर के भीतरी भाग में प्रवेश वर्जित करें, पूरे घर              मे बेतरतीब से कदापि न फैलाएं.
  •           बर्तन मांजने का स्थान ब्रम्ह्स्थान (घर के मध्य भाग) में न बनाएं.
  •           शयनकक्ष में कभी जूठे बर्तन नहीं रखें, अन्यथा परिवार में क्लेश और धन की हानि हो सकती है.
  •           घर में किसी भी तरह का कबाड़ इकट्ठा न होने दें.
  •           कुबेरी बेला (भगवान कुबेर का समय) याने संध्याकाल में सोना नहीं चाहिए.
  •          बॉक्स पलंग के अन्दर भी फालतू सामान इकट्ठा न करे, भरे हए सामान को भी साल में कम से कम दो बार बाहर               निकालें अलाटाएं पलटाएं , जरूरी होने पर धुप दिखाएँ, सेंधा नमक के पानी से पोछा लगा कर फिर रखें.

 

 

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