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जानें, बेहतर रिजल्ट्स के लिए कैसा हो आपका स्टडी रूम

Vastu Rashifal

जानें, बेहतर रिजल्ट्स के लिए कैसा हो आपका स्टडी रूम

 

 

दिसंबर  महीने में सेमेस्टर एग्जाम के साथ ही परीक्षाओं दौर भी शुरू हो जाता है.  यह  समय स्टूडेंट्स के लिए तनाव भरा समय लेकर आता है.आइये ऐसे में देखते हैं की  वास्तु शास्त्र के सिद्धांत छात्रों की कितनी मदद करते हैं. यह सही है की वास्तु छात्रों को उनके परीक्षा परिणामो में सीधे कोई जादुई परिवर्तन नहीं कर  सकता किन्तु  यह  उनके प्रयासों को सही दिशा में पुनर्निर्देश कर और एक तनाव रहित वातावरण में बढ़िया परिणाम दिलाने का रास्ता अवश्य दिखा  देता है. चलिए क्रमवार देखते हैं किन किन क्षेत्रों में इन सिद्धांतों का पालन लाभदायक हो सकता है:

Focused student surrounded by books

 

अध्ययन कक्ष  की दिशा:-

पढ़ाई  के लिए घर के  पूर्व, उत्तर या घर के उत्तर-पूर्व (ईशान)दिशा में स्थित कमरे का चुनाव करना चाहिए.इन दिशाओं में भरपूर धनात्मक ऊर्जा का प्रवाह रहता है. अतः  छात्रों की अपने  विषयों को समझने और ग्रहण करने में आसानी होती होती है, याद की हुई पाठ्य सामाग्री देर तक याद रही आती है.

नोट: यदि किसी कारण वश इन दिशाओं में अध्यन कक्ष नहीं बन पा रहा तो घर के पश्चिम में स्थित कमरे का चुनाव किया जा सकता है.

 

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अध्ययन कक्ष की आंतरिक   व्यवस्था:-

* पढ़ाई की टेबिल : इसे दीवाल से सटा  कर न रखें।

जहाँ  तक संभव  हो टेबिल इस तरह राखी जाए कि पढ़ते समय छात्र का मुंह पूर्व या उत्तर दिशाकी ओर  हो.

* प्रकाश के लिए ट्यूब लाइट पूर्व में लगाएं. यदि टेबिल लैंप का इस्तेमाल करते हैं तो इसे दक्षिण पूर्व दिशा में रखें.

* घडी को उत्तर दिशा में रखना या उत्तर की दीवाल पर लगाना सर्वश्रेष्ठ है.

*कंप्यूटर का स्थान भी दक्षिण पूर्व में उचित है.

* अपने इष्ट देव का चित्र विषेश  कर सरस्वती जी एवं गणपति जी के चित्र सामने रखने से एकाग्रता बढ़ती है.

* टेबल पर सिर्फ उन्हीं पुस्तकों को रखें जो तुरंत पढ़ी जा रही हों बाकी को अलमारी में व्यवस्थित रखना चाहिए

पुस्तकों के बेतरतीबी से टेबिल पर पड़े रहने से ऋणात्मक  ऊर्जा का क्षेत्र बन जाता है.

*फेंगशुई के अनुसार “एजुकेशन टावर” का रखा जाना छात्रों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है.

* टेबिल के  उत्तर एवं पूर्व में कोई भी भारी सामग्री यहां तक की भारी पुस्तकों का रखना भी उचित नहीं है.

* कुर्सी सीधे किन्तु  अारामदायक, पीठ को सपोर्ट करने वाली होनी चाहिए तथा इसे पूर्व अथवा उत्तर मुखी रखना

चाहिए. ध्यान रखें की छात्र की कुर्सी किसी भी हालत में बीम के नीचे न हो अन्यथा बीम से आने वाली ऋणात्मक

ऊर्जा उसके मस्तिस्क में जबरदस्त तनाव पैदा करदेगी   और पढ़ाई सही ढंग से नहीं हो पाएगी.

* पुस्तकों की अलमारी : इसे द्क्षिण, दक्षिण पश्चिम ( नैत्रत्य) अथवा पश्चिम में रखना चाहिए

* पलंग : छात्र का पलंग ऐसे लगाया जाना चाहिए जिससे  सोते समय उसका सर दक्षिण दिशा में हो एवं पैर उत्तर कीओर हो, ऐसा करने से छात्र का शरीर पृथ्वी के चुंबकीय धारा के समांतर होगा एवं रक्त का परवाह  मस्तिस्क की ओर उचित रूप से होगा. उसे अच्छी नीदं आएगी  एवं शरीर तरोताज़ा रहेगा. यदि ऐसा संभव न हो तो पूर्व की ओर   सर रख कर सोना द्वितीय प्राथमिकता में आता है.

* यदि कूलर का उपयोग करते हैं तो इसे उत्तर या पूर्व की खिड़की में लगाना ही  उचित है.

* कमरे में पीने के पानी का बर्तन/ घड़ा उत्तर पूर्व में रखा जाना चाहिए.

* अध्ययन कक्ष की दीवारों के रंग हल्का पीला  या  नारंगी रखा जाना उचित है इनसे पढ़ाई का उचित वातावरण निर्माण होता है एवं छात्रों को एक आंतरिक ऊर्जा का अनुभव होता है.

* हर अध्ययन कक्ष की  छत को पिरामिड के रूप में नहीं बनाया जा सकता इसलिए पिरामिड कैप लगाकर पढ़ाई करना एक अच्छा विकल्प है

 

 

कुछ अन्य सुझाव:

 

* अध्घ्यन  कक्ष को साफ़ सुथरा रखें

* यदि संभव हो तो जूते  चप्पल एवं उपयोग किये हुए मोज़े कक्ष में नहीं रखें

* जूठे बर्तन भी कक्ष के बाहर रखें

* टीवी, म्यूसिक  सिस्टम आदि ध्यान बताने वाली चींजे भी कक्स में रखना उचित नहीं है. ( पर दुःख की बात है की स्मार्ट फोन आाजकल इन सब की कमी पूरी कर देता है अतः  उससे कमसे कम परीक्षा के दिनों बचना चाहिए)

* लम्बे समय तक बॉलपॉइंट पेन के इस्तेमाल से स्पोंडे लाइटिस होने की संभावना होती है ऐसा एक्प्रेयूसर पॉइंट्स पर गलत दबाव पड़ने से होता है अतः  फाइबर टिप पेन जेल पेन अथवा इंक पेन का इस्तेमाल करना ज्यादा उचित है.

 

 

photo credit : blogdailyherald.com,  s-media-cache-ak0.pinimg.com

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