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मोहन जोदड़ो की रहस्यमयी दुनिया

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मोहन जोदड़ो की रहस्यमयी दुनिया

 

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हम में से भला कौन मोहन जोदड़ो को नहीं जनता. प्राचीन भारत के इतिहास में एक समय यह नगर समृद्धि के शिखर पर था. वर्ष 1922 तक यह शहर जमीन के अन्दर अपने गौरव शाली इतिहास लिए  दफ्न  था. दयाल दास साहनी द्वारा हड़प्पा की खोज के साथ ही इस नगर का इतिहास भी लोगों के सामने आने लगा. मेरी प्रॉपर्टी आपको बताने जा रहा है  मोहन जोदड़ो के इतिहास और और इस नगर से जुड़े रोचक तथ्य के बारें में.

मोहन जोदड़ो प्राचीन सिंधु घाटी का रहस्यमयी महानगर है जो की अभी दक्षिण एशिया के सिंधु नदी के पास मौजूद था. मोहन जोदड़ो का मतलब हिंदी में मृतकों का टीला होता है. पुरातत्व विभाग के अनुसार 2600 बी. सी  पूर्व इस नगर का निर्माण हुआ था.

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साल 1930 में इस जगह में बहुत ज्यादा खुदाई की गयी. जॉन मार्शल, के. एन. दीक्षित, अर्नेस्ट मक्के के निर्देश के अनुसार बाद में मोहन जोदड़ो की ज्यातर खुदाई साल 1964-1965 में डॉ. जी. ऍफ़. डेल्स ने किया.  इसके बाद इसकी खुदाई को रोक दिया गया ताकि इसकी संरचनाओं को सुरक्षित रखने के लिए तथा गलने या अपक्षय होने से रोकने के लिए माना जाता है कि यह शहर 200 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला था और कहा जाता है 100 साल में जितना भी खुदाई हुआ है वह मात्र इस शहर का एक तिहाई ही है. इसकी खुदाई में बड़े पैमाने में इमारतें, धातुओं की मूर्तियाँ और मुहरें आदि मिले हैं.

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सुव्यवस्थित बसाहट

इस नगर का निर्माण उस दौर में भी इतने सुव्यवस्थित ढंग से किया गया था कि आप इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते. नाली, पानी और सिवरेज के साथ ही आवागमन के लिए सड़कों का निर्माण किया गया था. घरों का निर्माण भी सुव्यवस्थित ढंग से किया गया था. स्वच्छता पर भी खास  ध्यान दिया गया था. इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण इस नगर में सुव्यवस्थित ढंग से किया गया था.

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कहा जाता है कि यह सभ्यता लगभग 5500 साल  पुरानी है और इसकी जनसँख्या तक़रीबन 40000 से भी अधिक थी.  लेकिन आई आई टी खरगपुर के वैज्ञानिकों  के अनुमान के मुताबिक 5500 से 8000 साल तक पुरानी हो सकती है.

  • सिंधु घाटी संस्कृति में कई ऐसे स्थान पाए गये है जहाँ रहा करते थे. यहाँ प्राप्त अवशेषों से यह भी ज्ञात हुआ है कि उस समय लोग युद्ध का भी नाम नहीं लेते थे.  पीने के पानी के लिए कुओं का उपयोग होता था.
  • मोहन  जोदड़ो विश्व की सबसे बड़ी सभ्यता के रूप में पाई गयी है जो 4 प्राचीन नदी से जुड़ी हुई है. यह भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में कुल 12 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है.

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  • मोहन जोदड़ो में खुदाई पर बहुत ही बड़ा और सुन्दर बुद्ध स्तूप भी मिला.

मोहन जोदड़ो शहर की गलियों में आज भी आप घूम सकते हैं। वहां की दीवारें आज भी  बहुत मज़बूत हैं.

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  • इस काल में लोगों द्वारा जो आभूषण पहने जाते थे वे पत्थरों के होते थे. ये आभूषण कीमती पत्थरों के बनते थे.
  • मोहन जोदड़ो के देव मार्ग वाले गली में करीब चालीस फुट लम्बा, पच्चीस फुट चौड़ा और छ: फुट गहरा प्रसिध्द जल कुंड मिला है जो की बहुत ही मज़बूत रूप से बनाया गया है.

 

 

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