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सवाल आपका,समाधान हमारा -मेरी प्रॉपर्टी फोरम

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यदि आपके पास घर या संपत्ति से जुड़ा कोई सवाल है तो हमें मेल करें या फिर करें कॉल

 मेरे दादा के चार बेटे और चार बेटियां हैं जिनका विवाह हो चुका है. मेरे दादा का देहांत हो चुका है तथा अब मेरे चाचा मेरे दादा जी के पूरे मकान और दुकानों पे कब्ज़ा कर के बैठे हैं और अपने भाइयों को हिस्सा नहीं दे रहे. कृपा कर के बताएं मुस्लिम कानून के अनुसार किस तरह बंटवारा करवाया जाये. क्या इसमें विवाहित बेटियां भी हिस्सा लेंगी?

समाधान – मुस्लिम विधि में यदि किसी व्यक्ति के पुत्र न हो तो पुत्रियों को शेयरर माना जाता है, लेकिन यदि पुत्र हो तो वे रेजीड्युअरी हो जाती हैं. पुत्र और पुत्रियाँ दोनों होने पर पिता की संपत्ति में पुत्रों और पुत्रियों को प्राप्त होने वाली संपत्ति का अनुपात 2 : 1 होगा. लेकिन यदि अन्य क्यों शेयर हुआ तो इस हिस्से में परिवर्तन हो जाएगा. इस कारण आप को यह बताना होगा कि दादा जी की मृत्यु के समय उन के कौन कौन से शेयरर तथा रेजीड्युअरी जीवित थे. यदि दादा जी के उत्तराधिकारियों में केवल 2 पुत्र और 4 पुत्रियाँ ही जीवित थीं तो चार हिस्से पुत्रियों के और 4 हिस्से पुत्रों के इस तरह कुल संपत्ति के 8 हिस्से होंगे. दोनों पुत्रों में से प्रत्येक को 2/8 अर्थात 1/4 हिस्सा प्राप्त होगा. जब कि प्रत्येक पुत्री को 1/8 हिस्सा प्राप्त होगा. आप के मामले में आप के चाचा ने सारी संपत्ति पर कब्जा कर लिया है तो आप के पिता को या किसी भी अन्य उत्तराधिकारी को उक्त समस्त संपत्ति के बँटवारे के लिए दीवानी वाद संस्थित करना पड़ेगा.

 मेरी बुआ फूफा ने मुझे 2 वर्ष कि आयु से गोद ले कर पालन पोषण किया. अब मेरी आयु 28 वर्ष है फूफा की मृत्यु पहले ही हो गई थी, बुआ कि मृत्यु अब हो गई है. उनके दवा, ईलाज, अंतिम संस्कार मैंने ही किया. उनकी कोई औलाद नहीं थी. वोटर कार्ड आधार कार्ड, राशन कार्ड, सब जगह पिता के स्थान पर फूफा का नाम है. क्या मुझे संम्पत्ति में अधिकार मिल सकता है?

समाधान – आप को फूफा और बुआ की संपत्ति में अधिकार तभी प्राप्त हो सकता है जब कि आप अपने फूफा के गोद लिए हुए पुत्र हों या फिर आप के फूफा या बुआ दोनों में से किसी ने उन की संपत्ति आप को वसीयत कर दी हो. आप ने वसीयत का उल्लेख नहीं किया है जिस का अर्थ है कि उन दोनों ने आप के हक में कोई वसीयत नहीं की है. आप ने तीन दस्तावेजों में पिता के स्थान पर अपने फूफा का नाम दर्ज होना अंकित किया हुआ है. इन में से वोटर कार्ड और आधार कार्ड ऐसे दस्तावेज हैं जिन में पिता का नाम बिना पिता की सहमति के भी अंकित किया जा सकता है. इस कारण इन दस्तावेजों से यह साबित करना संभव नहीं है कि आप अपने फूफा के गोद पुत्र हैं. राशन कार्ड एक ऐसा दस्तावेज है जिस में आप के फूफा का नाम मुखिया के रूप में दर्ज हो सकता है यदि ऐसा है तो उस के आधार पर यह माना जा सकता है कि उन्होंने आप को पुत्र का दर्जा दिया है. लेकिन फिर भी वास्तविक तथ्य यह है कि आप उन के पुत्र न थे. आप का स्वयं का कथन यह है कि उन्होंने आप को 2 वर्ष की उम्र से गोद लिया था. तब आप को यह प्रमाणित करना होगा कि उन्होंने आप को गोद लिया था. गोद लेना अर्थात दत्तक ग्रहण को प्रमाणित करने का प्राथमिक साक्ष्य तो यह है कि दत्तक ग्रहण को कोई दस्तावेज लिखा गया हो और उसे उप पंजीयक के कार्यालय में पंजीकृत कराया गया हो. दत्तक ग्रहण को एक और तरीके से साबित किया जा सकता है. कोई विवाद होने पर आप न्यायालय में मौखिक साक्ष्य से साबित कर सकते हैं कि जब आप दो वर्ष के थे तो आप की बुआ और फूफा ने वाकई गोद लेने का समारोह आयोजित कर आप को गोद लिया था जिस में आप के माता-पिता और आप को बुआ-फूफा की सहमति थी.

 एक स्त्री के नाम पर एक भूखंड (स्व अर्जित आमदनी से लिया हुआ) है. वह अपने पति की दूसरी पत्नी है इस स्त्री के 2 संतान हैं और 2 सौतेली संतान हैं. इस स्त्री की मृत्यु के बाद इस भूखंड पर किस-किस का हक़ होगा?

समाधान – हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 14 के अन्तर्गत किसी भी हिन्दू स्त्री की संपत्ति उस की परम संपत्ति होती है. उस में किसी का अधिकार नहीं होता. वह उसे विक्रय कर सकती है, दान कर सकती है और किसी भी अन्य रीति से हस्तान्तरित कर सकती है. वह उस की वसीयत भी कर सकती है. स्त्री के देहान्त के उपरान्त उस की संपत्ति हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 15 के अनुसार उस के उत्तराधिकारियों को प्राप्त होती है. उस के प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारियों में उस के पुत्र, पुत्री व पति सम्मिलित हैं,अर्थात किसी स्त्री की मृत्यु के उपरान्त जितनी संतानें होंगी उन में पति को जोड़ कर जो संख्या आएगी उन सब को उस की संपत्ति का बराबर हिस्सा प्राप्त होगा. आप के मामले में यदि उस स्त्री के पुत्री भी है तो उस की सम्पत्ति उस की मृत्यु के उपरान्त उस के दोनों पुत्रों, पुत्री व पति में बराबर बंटेगी. यदि पुत्री नहीं है तो उस के दो पुत्रों व पति तीनों को एक तिहाई हिस्सा प्राप्त होगा. उस स्त्री के सौतेले पुत्रों को और यदि सौतेली पुत्रियाँ भी हों तो उन्हें कुछ भी प्राप्त नहीं होगा.

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