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2016 रियल्टी बाजार में आएगी बहार..

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2016 रियल्टी बाजार में आएगी बहार..

 

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2016 प्रॉपर्टी और रियल एस्टेट मार्केट के लिए कैसा रह सकता है और क्या नए साल में सस्ते होंगे घर, क्या होंगी चुनौतियां आइए जानते हैं इस कवर स्टोरी के माध्यम से…

निवेश को लेकर बेहतर माहौल

रियल एस्टेट सेक्टर में सुधार के संकेत मिल रहे हैं. घर खरीददार एक बार फिर से घर खरीदने की ओर रूख कर रहे हैं. वित्तीय शोध तथा विश्लेषण कंपनी जाईफिन रिसर्च के अनुसार नया घर खरीदने के सेंटिमेंट इंडेक्स में लगातार सुधार हो रहा है. इसकी वजह कर्ज लेने की लागत में गिरावट, रोजगार के अवसर में बढ़ोतरी की उम्मीद और कम कीमत के घरों की सुलभता बढऩा है. रिसर्च फर्म के अनुसार इन सभी कारणों से सेंटिमेंट सकारात्मक हुआ है और घर रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में निवेश को लेकर माहौल बना है.

धीरे – धीरे देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है. अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच का मानना है कि भारत में निवेश के माहौल में सुधार हुआ है. एजेंसी का कहना है कि निवेश को लेकर रुझान बढऩे और ब्याज दरों में कटौती से सबसे बड़ा फायदा रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा. मार्च 2016 से रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी लौटेगी और कर्ज में डूबे डेवलपरों को राहत मिलेगी. सरकार ने 100 नई स्मॉर्ट सिटी बनाने की बात की है और मेक इन इंडिया जो लॉन्च हुआ है उससे कुल मिलाकर इंडस्ट्री को ही फायदा होगा. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि नए बीज डाले गए हैं और मील के पत्थर रखे गए हैं जिनपर आगे बढऩा काफी अहम होगा. इस सरकार ने लोगों के मन में आशाएं जगाई हैं. सरकार ने 2022 तक सबको घर देने की बात की है और इसके चलते रियल्टी मार्केट में नया उत्साह आया है. इतना ही नहीं डेवलपरों के मन में भी नई उम्मीदों का संचार हुआ है और वो अब खरीदार की मांगों के मुताबिक काम करने के लिए तैयार हो रहे हैं. कुल मिलाकर नई सरकार नए सेंटीमेंट लेकर आई है और अब इसका अच्छा फायदा रियल एस्टेट मार्केट को मिलेगा. एक्सपर्टस का मानना है कि, आवास ऋण के सस्ता नहीं होने के बावजूद लोगों के घर खरीदने की प्रवृत्ति कमजोर नहीं होने से वित्त वर्ष 2016-17 में रियल्टी क्षेत्र में बूम आने की उम्मीद है. इस क्षेत्र में सुधार शुरू हो गया है और इस साल मार्च तक घरों की माँग में तेजी आयेगी

 

 

कवर स्टोरी

सेंटिमेंट इंडेक्स में सुधार

जाईफिर रिसर्च के मुताबिक कैबिनेट द्वारा रियल एस्टेट रेगुलेटर बिल को मंजूरी मिलने से आने वाले दिनों में खरीददारों के सेंटिमेंट में और सुधार होगा. रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2015 के मुकाबले इस साल सेंटिमेंट धीरे-धीरे सकारात्मक हो रहा है. घर खरीदने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है. रिसर्च फर्म का कहना है कि आने वाले समय में ब्याज दरों में कमी होने से होम लोन लेना आसान होगा.

ब्याज घटने का हुआ असर

एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बेस रेट में कटौती से सेंटिमेंट सकारात्मक हुआ है. इससे खरीददारों को घर खरीदने के लिए उत्साहित किया है. खरीददारों के अधिकार की रक्षा, रियल एस्टेट में पारदर्शिता और समय पर प्रोजेक्ट का पजेशन होम बायर्स की लंबे समय से मांग है. देश में आर्थिक स्थिति बेहतर होने से होम बायर्स आशावादी हुए हैं. लोगों में इस बात के लिए उम्मीद बढ़ी है कि उनका जॉब सुरक्षित है. होम लोन पर ब्याज दर कम होने और कम कीमत की प्रॉपर्टी की उपलब्ध्ता ने निवेशकों को रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में निवेश करने को आकर्षित कर रहा हैं.

छोटे डेवलपर को मिलेगा बड़ा फायदा

फिच की रिपोर्ट के अनुसार ब्याज दरों में कटौती करने का सबसे अधिक फायदा रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा. ब्याज दरों में कटौती से क्रेडिट ग्रोथ को भी प्रोत्साहन मिलेगा. फिच का मानना है कि ब्याज दरों में कमी से मध्यवर्गीय और कम आय वर्ग के खरीददारों को फायदा मिलेगा, जिससे सबसे ज्यादा फायदा छोटे डेवलपरों को होगा. हालांकि बहुत बड़े डेवलपरों को ब्याज दरों में कटौती से बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिलेगा, क्योंकि इनके खरीददार ब्याज दरों को लेकर बहुत कम संवेदनशील होते हैं. इसके बावजूद कई कंपनियां 2016 के अंत तक अपने कर्ज को कम कर लेंगी.

आकर्षक बुकिंग स्कीम

फिच का मानना है कि डेवलपर के पास बिना बिकी प्रॉपर्टी की संख्या बहुत अधिक है. इसको कम करने के लिए डेवलपर आकर्षक पेमेंट स्कीम लेकर आए हैं. प्राय: सभी डेवलपर्स ने आकर्षक पेमेंट प्लान शुरू किए हैं. आकर्षक पेमेंट प्लान में प्रॉपर्टी की कुल कीमत का 20 फीसदी बुकिंग के समय भुगतान करना होता है और बाकी रकम पजेशन मिलने पर देनी होती है. फिच का मानना है कि पिछली दो तिमाहियों में 20 फीसदी प्रॉपर्टी की बुकिंग इसी पेमेंट प्लान के तहत हुई है.

अफोर्डेबल घरों की बाढ़

ताजा रिपोर्ट है कि अप्रैल-जून की तिमाही में देश के टॉप 8 शहरों में अफोर्डेबल घरों वाले प्रोजेक्ट की लॉन्चिग में 320 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. इसका मतलब है कि रियल एस्टेट बाजार में इनवेंटरी बढेगी और इसके नतीजे में अपार्टमेंट की कीमतें गिरेंगी. महंगे बैंक लोन, तमाम तरह के सरकारी फीस-शुल्कों-फीस और रिश्वतखोरी से परेशान बिल्डरों को फंड की कमी होगी और ऐसे में वे अपनी प्रॉपर्टी की कीमतें और कम करने को मजबूर होंगे. अगर आप सौदा करना चाहते हैं तो मोल-तोल कर ही कोई प्रॉपर्टी खरीदें, तैयार अपार्टमेंट खरीदने में ही फायदा है. प्रॉपर्टी की खरीदारी का यह सही समय है क्योंकि बेचने वाले ग्राहकों की शर्त मानने को तैयार हैं. मौजूदा माहौल में थोड़े मोल-तोल की भी गुंजाइश है. आने वाले वर्षों में बड़े शहरों की बजाय छोटे शहरों में प्रॉपर्टी खरीदने से अधिक लाभ होगा.

सस्ते घरों पर जोर

सरकार की तरफ से सस्ते घरों पर जोर और इस सेगमेंट में डिमांड बढऩे से देश भर में अफोर्डेबल हाउजिंग प्रोजेक्ट्स में बढ़ोतरी हुई है.Ó छत्तीसगढ़ सरकार की अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी के तहत रायपुर, बिलासपुर सहित और शहरों में कई प्रॉजेक्ट्स लॉन्च हुए. छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल ने भी सस्ते घरों के लिए निविदा आमंत्रित की है.

कैसे आयेगा बूम

तीन बदलाव अहम होंगे

201६ में रियल एस्टेट मार्केट में सुधार के लिए तीन बदलाव अहम होंगे. सबसे पहले वित्तीय घाटे को काबू में लाना, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन, कोर इकोनॉमी को बढ़ावा देना और साथ में पर्सेप्शन में सुधार लाना. रियल एस्टेट रेगुलेटर बिल का आना भी बेहद जरूरी है, लेकिन ये कब आएगा ये कहना मुश्किल है. सरकार के और इकोनॉमिक ग्रोथ के नजरिए से 2016 अहम होगा और इस साल का पहला हिस्सा ज्यादा अहम होगा जिसमें बजट आता है, तो बजट और बाकी पॉलिसी मेकिंग अगर जून तक ठीक होती है तो इंवेस्टर और एंड यूजर अपने आप आ सकते हैं. आज भी डिमांड और सप्लाई का मेल नहीं बैठ रहा

है, क्योंकि डिमांड तो बढ़ रही है लेकिन सप्लाई अनफोडेर्बेल प्राइस पर अटकी हुई है, लेकिन जब ये सही लेवल पर आ जाएं तब बैलेंस होगा.

3 फैक्टर्स अहम

काबू में आती महंगाई,

इकोनॉमी रिवाइवल और

अफोर्डेबल हाउसिंग

इन 3 फैक्टर्स के चलते साल 2016 अहम रहेगा. बाजार का पूरा सेंटिमेंट अच्छा है और अभी प्रॉपर्टी बाजार में खरीदारी का अच्छा मौका बन रहा है. कई नीतिगत बदलाव, जमीन अधिग्रहण बिल में बदलाव का फायदा मिलने में थोड़ा समय लगेगा. प्रॉपर्टी के दामों में गिरावट आने की आशंका है और अगर ऐसा होता है तो उसका फायदा सबको मिलेगा.

 

 

 

डिमांड

 

कवर स्टोरी

बेहतर रहेगा छत्तीसगढ़ का रियल एस्टेट मार्केट

अगर छत्तीसगढ़ में रियल एस्टेट मार्केट की बात की जाए तो, जानकारों का मानना है कि, वर्ष 2000 में नये बने तीन राज्यों में सबसे बेहतर मार्केट छत्तीसगढ़ का है. छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक संभावनाएं है. राज्य बनने के बाद राजधानी, न्यायधानी सहित दुर्ग -भिलाई, राजनांदगांव, कोरबा और अंबिकापुर में प्रॉपर्टी की डिमांड बहुत अधिक देखी जा रही है. यहां तक की जगदलपुर और रायगढ़ में भी डेवलपर्स प्रोजेक्ट लेकर आ रहे हैं. विषलेषकों का मानना है कि मार्केट के उतार और चढ़ाव का छत्तीसगढ़ में असर नहीं पडऩे वाला क्योंकि, यहां डिमांड और सप्लाई दोनों बराबर बनी हुई है. वर्ष 2016 में रियल एस्टेट सेक्टर को और ग्रोथ मिलेगी. छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल और निजी बिल्डरों की कई सारी योजनाएं साल 2016 में आकार लेंगी. वहीं बायर्स को भी घरों की तलाश है. इसके अलावा जमीन की डिमांड भी लगातार बढ़ रही है. लोग प्लॉट और कृषि में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. निश्चित रूप से यह साल प्रॉपर्टी के लिये समृध्दि कारक होगा तथा इस उद्योग से जुड़े लोगों को भी फायदा पहुंचेगा. बिल्डर और बायर्स ने तो अभी से योजनाएं बनाने भी शुरु कर दी है.

क्या कहते हैं जानकार…

केंद्र सरकार इस वर्ष हाउसिंग स्कीम लेकर आ रही है जो, रियल एस्टेट सेक्टर के लिये लाभकारी साबित होगा. 7वां पे कमीशन भी इस वर्ष लागू होने की संभावना है. निश्चित रूप से लोगों की क्रय शक्ति में इजाफा होगा और इसका लाभ रियल्टी सेक्टर को भी होगा. लोगों की पेयिंग कैपिसिटी बढ़ेगी और वे घर खरीदने के बारे में सोचेंगे. आने वाला समय अफोर्डेबल हाउसिंग का है. बिल्डर भी एण्ड यूजर्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहे हैं. स्मार्ट सिटी योजना में रायपुर और बिलासपुर के शामिल होने से प्रॉपर्टी की डिमांड और बढ़ेगी.

आनंद सिंघानिया

एम.डी., अविनाश ग्रुप

बीेते एक -दो वर्षों से जो धीमापन रियल एस्टेट मार्केट में बना हुआ है उम्मीद है 2016 में रफ्तार आयेगी. इस साल निर्माण सेक्टर में ग्रोथ देखने को मिलेगा. रेलुलेटरी बिल में सुधार की आवश्यकता है. कोई भी दुर्भावनावश इसका गलत फायदा उठाकर बिल्डर को फंसा सकता है. इसके साथ ही इस बिल में बनाये गये नियम पूर्ण और ऑन गोइंग प्रोजेक्ट पर नहीं लगना चाहिये. सरकार को इन बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिये. रियल एस्टेट सेक्टर के फायदे के लिये सरकार को सिंगल विंडो सिस्टम को कागजों से धरातल पर लाना चाहिये.

निखिल धगट

प्रेसीडेंट, क्रेडाई छत्तीसगढ़

2015 रियल एस्टेट मार्केट के लिये अच्छा रहा, उम्मीद है कि 2016 में रियल्टी सेक्टर एक नई उड़ान भरेगा. नये वर्ष में रियल एस्टेट रेगुलेटरी बिल भी लागू होने की संभावना हैै. हालांकि इसमें कुछ सुधार की जरूरत है. यह बिल बिल्डर और बायर दोनों के लिये फायदेमंद साबित होगा. आरबीआई को रेट ऑफ इंट्रेस कम करना चाहिये इससे जो लोग आशियाने का ख्वाब देख रहे हैं उनका सपना साकार होगा. सरकार को सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम जल्द से जल्द लागू करना चाहिये ताकि, प्रोजेक्ट की लागत घटाई जा सके और इसका फायदा बायर्स को मिले.

सुबोध सिंघानिया

सीएमडी, सिंघानिया बिल्डकॉन प्रा. लिमिटेड

2015 का मार्केट रियल एस्टेट सेक्टर के लिये ओवर-ऑल अच्छा रहा. बीते वर्ष भी मकानों की बिक्री में बढ़ोत्तरी हुई. आने वाला वर्ष 2016 भी उम्मीदों से भरा वर्ष है. रेगुलेटरी अधिनियम इस सेक्टर के लिये अच्छा है किन्तु इसमें कुछ सुधार करने की आवश्यकता है. क्रेडाई समय-समय पर सरकार को निर्माण सेक्टर में सुधार संबंधी सुझाव देती रहती है. सरकार को इस पर अमल करना चाहिये ताकि लोगों को बज़ट में उनके सपनों का आशियाना

मिल सके.

विजय नत्थानी

डायरेक्टर, वी.जी.आर. रियल एस्टेट

रियल एस्टेट मार्केट बीते वर्ष की तुलना में बेहतर किंतु औसत रहने के आसार है. आरबीआई का इंट्रेस रेट कम होगा तो जरूर इसका प्रभाव रियल एस्टेट सेक्टर में देखने को मिलेगा. केंद्र सरकार को जो रेगुलेटरी बिल लेकर आ रही है उसमें संशोधन करने की आवश्यकता है. बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष उम्मीद है कि घरों की बिक्री में इजाफा होगा. 2016 पूरी तरह सेक्टर के बदलाव के लिए तैयार है. इस विकास और गति के लिए ज़रूरी है की कुछ चीजों पर तत्परता से फैसले लिए जाये जैसे जीएसटी, अचल संपत्ति विधेयक, उद्योग का दजऱ्ा, एकल खिडक़ी अनुमोदन प्रणाली और भूमि अधिकरण विधेयक आदि.

अशोक पटवा

डायरेक्टर, लाल गंगा बिल्डर्स प्रा. लिमिटेड.

2016 भी बीते वर्ष की भांति बहुत अच्छा रहेगा. बायर्स की सोच घर को लेकर पॉजीटिव है. बेहतर ग्रोथ के लिये सरकार को गाइड लाइन रेट के बारे में सोचना चाहिये. इस साल जो रेगुलेटरी बिल आ रहा है इसका भी असर देखने को मिलेगा. बिल के फायदे और नुकसान दोनों हैं. सरकार को दोनों पक्षों का ध्यान रखना चाहिये. उम्मीद है की इस वर्ष रियल एस्टेट सेक्टर को और भी बेहतर ग्रोथ मिलेगी. निर्माण क्षेत्र में एफडीआई के नियमों में बदलाव से देश के रियल्टी सेक्टर पर खासा सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा. अफोर्डेबल हाउसिंग को मिलेगा लाभ.

संजय रहेजा

डायरेक्टर, एस.पी. बिल्डकॉन

बैंक के इंट्रेस रेट कम होंगे तो वर्ष 2016 में रियल एस्टेट सेक्टर के लिये और भी लाभकारी होगा. इंट्रेस कम होने से लोग घर खरीदने के बारे में विचार-विमर्श करेंगे. 2016 रियल एस्टेट सेक्टर के लिये उम्मीदों भरा है. मार्केट रिव्यू भी अच्छा है. रेगुलेटरी बिल में कुछ सुधार करने की आवश्यकता है. यह बिल्डर और बायर दोनों के लिये अच्छा होगा. वर्ष 2016 में कीमतों के स्थिर होने की उम्मीद लगाई जा रही है और वर्ष की आखरी तिमाही तक इसमें बढ़ोतरी देखने को भी मिल सकती है. आधुनिक और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का सपना 2016 में और तेज़ी पकड़ेगा.

प्रितेश कटारिया

डायरेक्टर, रिषभ बिल्डकॉन

2015 रियल एस्टेट के लिये औसत रहा. इस वर्ष लोगों और मार्केट के रूझान को देखते हुये उम्मीद है की ग्रोथ बेहतर रहेगी. उम्मीद है कि 2016 में रियल एस्टेट सेक्टर में विकास की रफ्तार 25 प्रतिशत की वृध्दि से होगी. घर और प्रॉपर्टी के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है. बिल्डर भी बायर के जरूरतों को ध्यान में रखकर प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहे हैं. रियल एस्टेट सेक्टर को और गति देने के लिये सरकार को सिंगल विंडो सिस्टम लागू करना चाहिये. रेगुलेटरी बिल में भी कुछ सुधार करने की आवश्यकता है.

अशोक लुंकड़

पृथ्वी डेवलपर, जगदलपुर

2016 से उम्मीदें बहुत हैं. आशा है कि यह वर्ष रियल एस्टेट के लिये फायदेमंद साबित होगा. इंट्रेस रेट कम होने से जो लोग आशियाने का ख्वाब देख रहे थे उनके सपनों को पर लगे हैं, लोग घर खरीदने के बारे में सोच रहे हैं. रेगुलेटरी बिल आने से

प्राइज हाई होंगी और इसका असर एंड यूजर्स पर भी पड़ेगा. सरकार को सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर बिल का निर्माण करना चाहिए. रियल एस्टेट सेक्टर में सिंगल विंडो सिस्टम लागू होना चाहिये. अपू्रवल में लेटलतीफी का सीधा असर प्रोजेक्ट के निर्माण और पजेशन में पड़ता है.

जी.एस. राजपाल

डायरेक्टर, जी.टी. होम्स

2016 रियल एस्टेट सेक्टर के लिये उम्मीदों भरा रहने की आशा है. बीते वर्षों की तुलना में इस साल तेजी देखने को मिलेगी. रियल एस्टेट मार्केट में तेजी आएगी और प्रॉपर्टी की बिक्री बढ़ेगी. निकट भविष्य में ब्याज दर कम होने की उम्मीद है. ब्याज दर कम होने से प्रॉपर्टी की खरीददारी बढ़ेगी. कम कीमत के घरों की मांग को पूरा करने के लिए डेवलपर्स अफोर्डेबल हाउसिंग पर फोकस करेंगे. इस बिल के बाद सेक्टर का कामकाज बेहतर होगा, हालांकि वो इसमें कुछ सुधार की जरूरत है. सरकार को रियल एस्टेट को और भी अधिक बूस्ट-अप डोज देने के लिये सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लाना चाहिये. प्रोजेक्ट निर्माण और अपू्रवल में होने वाली देरी से राहत मिलेगी.

अशोक साहू

डायरेक्टर, अभिषेक बिल्डकॉन

बीता वर्ष रियल एस्टेट सेक्टर के लिये अच्छा रहा. 2016 में इस सेक्टर से और भी ज्यादा उम्मीदें है. निर्माण सेक्टर के बेहतर ग्रोथ के लिये सरकार को सिंगल विंडो सिस्टम लाना चाहिए. इसका फायदा दोनों वर्गो को मिलेगा. केंद्र सरकार द्वारा शासकीय कर्मचारियों के वेतन में वृध्दि होने से लोग घर लेने के बारे में सोचेंगे. रेगुलेटरी बिल लांग टर्म के लिये रियल एस्टेट सेक्टर के लिये फायदेमंद साबित होगा. बिल के आने से कार्यशैली सुनियोजित ढ़ंग से होगी. बिल में कुछ सुधार की आवश्यकता है केंद्र सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिये.

विनय संतवानी

डायरेक्टर, रूद्राक्ष रियल्टीज

अफोर्डेबल हाउसिंग के लिये 2016 बहुत ही फायदेमंद साबित होगा. 7वें पेय कमीशन के आने लोगों की बाइंग कैपिसिटी में इजाफा होगा. लोग अब घर खरीदने के बारे में विचार कर रहे है जो, रियल एस्टेट सेक्टर के शुभ संकेत है. उम्मीद है कि इस वर्ष रियल एस्टेट मार्केट तेजी से ग्रोथ करेगा. केंद्र सरकार जो रेगुलेटरी अधिनियम लेकर आ रही है वह रियल एस्टेट के लिये अच्छा है किंतु इसमें कुछ सुधार करने की आवश्यकता है. बिल के माध्यम से सरकार को कोशिश करना चाहिये की किसी का भी अहित न हो. बैकों का भी रियल एस्टेट सेक्टर को भरपूर सहयोग मिल रहा है. पहले जहां इंट्रेस रेट में कटौती हुई वहीं अब 80 प्रतिशत तक फायनेंस की सुविधा ग्राहकों को मिल रही है.

अनिमेश दुबे

सीईओ, क्राउन रियल्टीज

2015 में रियल एस्टेट मार्केट थोड़ा सुस्त रहा है. उम्मीद है कि नये वर्ष में रियल एस्टेट सेक्टर एक नये रफ्तार के साथ आगे बढ़ेगा. सरकार की योजनाओं का भी रियल एस्टेट सेक्टर में प्रभाव पड़ेगा. इस वर्ष केंद्र सरकार की हाउसिंग फॉर ऑल स्कीम आने वाली है रियल एस्टेट के सेक्टर के लिये यह शुभ संकेत है. इसके साथ ही रेगुलेटरी बिल की भी आने की उम्मीद है किंतु इसमें सरकार को दोनों पक्षों के हित और अहित को ध्यान में रखना चाहिये. सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम अगर लाया जाता है तो यह बिल्डर और बायर दोनों के लिये फायदेमंद साबित होगा.

एस.पी. चतुर्वेदी

प्रेसीडेंट, क्रेडाई बिलासपुर

2016 में हाउसिंग सेक्टर बूस्ट करेगा या नहीं यह केंद्र सरकार के 7वें वेतनमान पर निर्भर करता है. सरकार द्वारा अगर इसे जल्द से जल्द लाया जाता है तो लोगों की क्रय क्षमता में इजाफा होगा और वे घर खरीदने के बारे में विचार करेंगे. 2015 रियल्टी सेक्टर के लिये अच्छा नहीं रहा. नये वर्ष से काफी उम्मीदें हैं. रियल एस्टेट सेक्टर को सबसे ज्यादा मार टैक्सेसन से हो रहा है. टैक्स की कीमतों में इजाफा हो रहा है तो इसका असर मकानोंकी कीमतों पर पड़ रहा है. सरकार को रियल एस्टेट सेक्टर को बल प्रदान करने और प्रोजेक्ट निर्माण में होने वाले लेटलतीफी से निपटने के लिये सिंगल विंडो सिस्टम जल्द से जल्द लाना चाहिये.

घनश्याम शुक्ला

सेक्रेटरी, क्रेडाई बिलासपुर

2015 रियल एस्टेट सेक्टर के लिये औसत रहा. 2016 में उम्मीद है रियल एस्टेट सेक्टर की ग्रोथ बढ़ेगी. 7वां पेय कमीशन लागू होता है तो इसका सीधा असर रियल एस्टेट सेक्टर में पड़ेगा. वेतन में वृध्दि होने से लोग घर खरीदने के बारे में सोचेंगे. रियल्टी सेक्टर के बेहतर विकास के लिये सरकार को सिंगल विंडो सिस्टम लागू करना चाहिये. टैक्स के भार को भी कम करने की जरूरत है. इंट्रेस रेट में कमी आयेगी तो यह रियल एस्टेट सेक्टर के लिये और भी फायदेमंद साबित होगा. रेगुलेटरी बिल रियल एस्टेट सेक्टर के लिये लाभदायक है इससे बायर्स की दुविधा दूर होंगी और वे घर खरीदेंगे.

आलोक हथगेन

डायरेक्टर, एस.एस.बी.डी.

नये साल में रियल एस्टेट सेक्टर से काफी उम्मीदें है. मार्केट और बैंक की तरफ से भी रियल एस्टेट सेक्टर को बहुत रिस्पांस मिल रहा है. इंट्रेस रेट कम होने से उम्मीद है कि बायर्स घर लेने के लिये सोचेंगे. रियल्टी सेक्टर को और अधिक गति देने के लिये सरकार को प्रोजेक्ट के अपू्रवल में होने वाली देरी को दूर करने के लिये सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लाना चाहिये इसका फायदा बिल्डर के साथ कस्टमर को भी मिलेगा. केंद्र सरकार द्वारा जो रेगुुलेटरी बिल लाया जा रहा है उसमें कुछ सुधार की जरूरत है सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिये. बिल का निर्माण दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर करना चाहिये.

कल्पना सोनी

एमडी, धरा इंफ्राबिल्ड

रियल स्टेट मार्केट 2016 में थोड़ा धीमा रहेगा. अन्य सेक्टरों पर पड़े मंदी की मार निर्माण सेक्टर में भी देखने को मिलेगी. हालांकि स्थिति 2015 के अपेक्षा अच्छी रहेगी. वर्ष के मध्य के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में ग्रोथ देखने को मिल सकता है जो 2017 में और तेज होगा. बात अगर छत्तीसगढ़ के रियल एस्टेट मार्केट की जाये तो रायपुर तेजी से विकसित होते शहरों में से एक है. आने वर्षों विकास की संभावनाओं को देखते हुये यह कयास लगाया जा सकता है कि यहां नये-नये प्रोजेक्ट्स आयेंगे और प्रॉपर्टी की कीमतों में इजाफा होगा. नया रायपुर और स्मार्ट सिटी बनने के बाद रायपुर सेंट्रल इंडिया में प्रॉपर्टी का प्रमुख डेस्टिनेशन बन गया है. संभावनाओं वाले शहर में हमेशा प्रॉपर्टी का ग्रोथ अच्छा रहता है.

डॉ. आर.एस. मोहन

प्रिंसिपल (एमबीए), दिशा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एण्ड टेक्नोलॉजी

2016 में रियल एस्टेट सेक्टर को मंदी की मार झेलनी पड़ सकती है. अन्य सेक्टर में छाई मंदी का असर रियल एस्टेट सेक्टर में भी पड़ सकता है. देश में जी.डी.पी. का विकास भी धीमा रहेगा. सभी सेक्टर का असर एक दूसरे पर पड़ता है, इस लिहाज से इस बात की आशंका बहुत अधिक है कि निर्माण सेक्टर इस वर्ष सुस्त रह सकता है. दूसरा प्रमुख कारण लोगों की क्रय क्षमता में हुई कमी है वहीं इसकी तुलना में प्रॉपर्टी की कीमते बढ़ी है और यह लोगों के बजट से बाहर है. छत्तीसगढ़ का रियल एस्टेट मार्केट की स्थिति देश के रियल एस्टेट मार्केट की तरह ही रहेगी.

अशोक पारख

अर्थशास्त्री, रायपुर

2016 में रियल एस्टेट मार्केट अच्छा रहेगा. बीते वर्ष की तुलना में इस साल ग्रोथ देखने को मिलेगा. 2015 में रियल्टी सेक्टर औसत रहा. नये वर्ष में रियल एस्टेट सेक्टर से काफी उम्मीदें है. रेट ऑफ इंट्रेस कम हुआ है. इससे बायर्स को घर खरीदने के लिये आकर्षित होंगे. आने वाले समय में और भी उम्मीद है कि आरबीआई होम लोन के ब्याज में कटौती करेगी. सरकार द्वारा जो रेगुलेटरी बिल रियल एस्टेट सेक्टर के लिये लाया जा रहा है, उसमें बायर्स के साथ – साथ बिल्डर का भी ध्यान रखना चाहिये. बिल ऐसा हो जो सबके लिये लाभकारी हो और नुकसान किसी का न हो.

स्ंादीप अग्रवाल

मैनेजिंग डायरेक्टर, सांई वैभव इन्फ्रा रियल्टीस प्रा.लि.

दो-तीन वर्षों से जो रिसेसन का टाइम रियल एस्टेट सेक्टर में चल रहा था वह अब खत्म होने को है. उम्मीद है कि 2016 बीते वर्ष की तुलना में रियल्टी सेक्टर के लिये बेहतर साबित होगा. रियल एस्टेट मार्केट ग्रोथ की ओर अग्रसर है. बायर्स भी अपना आशियाना खरीदने के लिये उत्सुक है. रियल्टी सेक्टर को और बेहतर ग्रोथ देने के लिये सरकार को सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू करना चाहिये. इसके आने से निर्माण सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होगा. प्रोजेक्ट में लेटलतीफी दूर होगी तो बिल्डर भी कस्टमर को उनका घर टाइप पर डिलीवर कर पायेंगे.

प्रीतेश साहू

एच.ओ.डी., आर.एस. ग्रुप

 

 

 

 

 

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