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इन तरीकों से अपने पुराने मकान को दें आपदा से सुरक्षा

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इन तरीकों से अपने पुराने मकान को दें आपदा से सुरक्षा

हर किसी को अपने परिवार और घर की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है. समय गुजरने के साथ-साथ घर की बनावट में भी कुछ न कुछ कमियां उजागर होने लगती हैं. छतों और दीवारों पर पड़े दरारों को देख कर हमेशा घर की चिंता लगी रहती है.

वर्तमान में प्रकृति के स्वरुप को देखते हुए भी घरों की आयु कम होती जा रही है. प्राकृतिक आपदा और बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग की वजह से पृथ्वी की जलवायु में परिवर्तन के कारण अपेक्षित घटनाएँ बढ़ती जा रही है. भूकंप, तूफान और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाएं मानव जीवन को झकझोर कर रख देती हैं. आजकल इन्हीं समस्याओं को देखते हुए भूकंप रोधी घरों के निर्माण में काफी बढ़ोत्तरी हुई है. लेकिन अगर आपका घर भूकंपरोधी नहीं है और पुराना हो गया है तो कुछ आसान उपायों के माध्यम से अपने घरों को मजबूती प्रदान कर सकते हैं. इससे आपके घर के साथ-साथ परिजनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो जाती है.

समय पर कराएं मरम्मत

अधिकांश घर की दीवारों पर क्रैक होने की समस्या ज्यादा आती है. इनसे बचने के लिए अपने घर निर्माण के समय अच्छे बिल्डिंग मटेरियल के साथ-साथ नक्शे के अनुसार निर्माण को ध्यान में रखना जरुरी होता है. पुराने समय में नक्शे को उतना तवज्जों नहीं दिया जाता था परन्तु निर्माण की सामग्री उच्च गुणवत्ता के कारण मकान सदियों तक टिकी रहती थी. यदि आपके घर का निर्माण पूर्वजों द्वारा किया गया है और लम्बे समय से उसमें कोई मरम्मत या रेनोवेशन नहीं हुआ है तो जल्द से जल्द किसी अच्छे इंजिनियर से सलाह लेकर उसके विनिर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दें जिससे पुराने घर को ज्यादा मजबूती मिल सके.

इन तकनीक से पुराने घर को बनाएं मजबूत

घर के निर्माण में उपयोग किये जाने वाले सीमेंट की आयु ज्यादा से ज्यादा 50 से 70 वर्ष होती है जिससे एक समय के बाद घर की मजबूती में कमी आने लगती है. इसलिए समय-समय पर घर की जाँच करने के साथ मरम्मत भी कराते रहें. इन आसान तरीकों से आप अपने पुराने घर को मजबूती प्रदान कर सकते हैं ताकि वह किसी भी प्रकार के प्राकृतिक आपदा में सुरक्षित बना रहे.

  • यदि आपके घर में पिलर नहीं है तो रेट्रोफिटिंग के माध्यम से उसे भूकंपरोधी बनाकर प्राकृतिक आपदा से पुराने घर की सुरक्षा कर सकते हैं.
  • पुराने घर के दरवाजों और खिडकियों के ऊपरी हिस्सों में जिस जगह से छत की शुरुआत होती है और लिंटर डाले जाते हैं उसमें लोहे की छड़ और स्टील के प्रयोग से मकान को मजबूती प्रदान किया जा सकता है इससे घर की उम्र बढ़ जाती है.
  • लिंटर डालने के लिए घर की दीवारों में दोनों ओर तार की जाली डालकर उसे माइक्रो कंक्रीट से ढंक कर और मजबूती प्रदान किया जा सकता है. इससे मकान को स्थिरता मिलती है.
  • पुराने मकानों में दीवारों को मजबूती प्रदान करने के लिए ईंट के पिलर बनाकर जोड़ा जाता था. यदि आपका घर भी ईंट के पिलर से जोड़ा गया है तो मकान के हर कोने पर 8 एमएम के सरिये को इसमें लगाकर माइक्रो कंक्रीट से जैकेटिंग करने से पिलरों की मजबूती और बढ़ जाती है.
  • यदि आपका मकान ढलान में बना हो या उसकी डिज़ाइन स्लोपिंग हो तो उसे गैबल बैंड के जरिए मजबूती प्रदान की जा सकती है. इसके लिए त्रिकोणीय आकर में प्लास्टर को हटाकर दोनों छोर पर सरिया बांध दें और उसे माइक्रो कंक्रीट से लेबल कर जैकेटिंग करने से घर को भूकंप झेलने हेतु ज्यादा मजबूती मिलती है.
  • कभी कभी भूकंप के हल्के झटकों से घर की दीवारों और खासकर जोड़ वाले हिस्सों जैसे दरवाजे और खिडकियों के पास दरारें पड़ जाती है. अगर आपके घरों में लगे दरवाजों और खिडकियों की लम्बाई एक मीटर से अधिक है तो उसके चारों तरफ तार की जाली लगाकर कंक्रीट से कवर करने से झटकों के दौरान क्रैक नहीं पड़ता है.

 

Photo Credit- goantourism.com, rashidamalik.com, ivim.com.au

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