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जमीन की कीमत बढ़ने से खुश हैं, तो यह पॉलिसी आपको कर सकती है निराश

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जमीन की कीमत बढ़ने से खुश हैं, तो यह पॉलिसी आपको कर सकती है निराश

अगर आपकी प्रॉपर्टी के दाम दिनों दिन बढ़ रहें है तो उसके एवज में आपको केंद्र सरकार को टैक्स चुकाना पड़ सकता है. जहाँ पर आपने प्रॉपर्टी खरीदी है वहां कोई सरकारी योजनाओं का संचालन हो रहा है जिसके कारण उस प्रॉपर्टी के दाम बढ़ रहें है तो जल्द ही आपको टैक्स भरना पड़ सकता है. केंद्र सरकार इस पॉलिसी का फ्रेमवर्क तैयार कर चुकी है और अधिकतर राज्यों ने इसमें अपनी सहमती भी दे दी है.

28 फ़रवरी को अर्बन डेवलपमेंट मिनिस्‍ट्री की ओर से वेल्‍यू कैप्‍चर फाइनेंसिंग (वीसीएफ) पॉलिसी राज्य सरकारों के समक्ष रखा गया जिस पर राज्य सरकारों ने भी अपनी सहमती दे दी है. 2019-20 तक यह पॉलिसी सभी 100 स्मार्ट सिटी सहित 500 अमृत शहरों में लागू कर दिया जाएगा.

क्‍या है वेल्‍यू कैप्‍चर फाइनेंस पॉलिसी

बहुत से देशों में सरकारें आम जनता के लिए वेल्‍यू कैप्‍चर फाइनेंसिंग मॉडल के तहत इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट्स तैयार करती है. इन प्रोजेक्ट का मूल उद्देश्य पब्लिक इन्वेस्ट से निर्मित इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर से फायदा लेने वाले लोगों को सरकार को टैक्स भुगतान करना चाहिए. जिसके आधार पर केंद्र सरकार ने नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स ने नगर पालिका, पालिक निगम और नगर निगम की आय को बढ़ाने के लिए यह पॉलिसी तय की है.

इन राज्यों ने दी सहमती

अर्बन डेवलपमेंट मिनिस्‍टऱ वैंकेया नायडू की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में लगभग सभी राज्यों के अधिकारी शामिल हुए. इस बैठक में उन्हें जानकारी देते हुए श्री नायडू ने बताया कि भारत की जीडीपी में म्‍युनिसिपल सेक्‍टर से प्राप्त रेवेन्यु का शेयर केवल 0.75 प्रतिशत है जबकि अन्य देशों में इसकी ज्यादा हिस्सेदारी है. इसलिए राज्य सरकारों द्वारा म्‍युनिसिपल सेक्‍टर की आय में बढ़ोत्तरी करने हेतु यह पॉलिसी काफी मददगार होगी. बैठक में गुजरात, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, महाराष्‍ट्र, अरुणाचल प्रदेश और गोवा ने जल्द ही वीसीएफ मॉडल को लागू करने हेतु अपनी सहमती जताई है.

इन जगहों पर होगी पॉलिसी लागू

बैठक में अर्बन डेवलपमेंट मिनिस्‍ट्री ने उपस्थित सभी अधिकारियों को वीसीएफ मॉडल को लागू करने के लिए टारगेट तय कर दिया है. 2017-18 तक सभी राज्यों को इस पॉलिसी के लिए नियम एवं शर्तों को तय करने के साथ-साथ 2018-19 तक 10 लाख से अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में लागू कर दिए जाएंगे. 2109-20 तक सभी 100 स्मार्ट सिटी और 500 अमृत (अटल मिशन फॉर रिजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन) शहरों में लागू कर दिया जाएगा. मिनिस्ट्री ने तय समय पर पॉलिसी को लागू करने पर राज्य सरकारों को इंसेंटिव देने की पेशकस भी की है.

कौन से लग सकते हैं टैक्‍स

वेल्‍यू कैप्‍चर फाइनेंसिंग पॉलिसी लागू होने के बाद कुछ अन्य टैक्सों का अतिरिक्त प्रभार बढ़ सकता है. राज्य सरकारों के नियम एवं शर्तों के आधार पर निचे दिए गए टैक्सों में एक, दो या मल्टी टैक्स लगाने का फैसला किया जा सकता है.

बेटरमेंट चार्ज

यह चार्ज उन इलाकों में लगाया जा सकता है, जहां सरकार लैंड पुलिंग पॉलिसी के तहत लोगों से खरीदती है और वहां इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलप करके कुछ हिस्‍सा वापस दे देती है. इसके बाद सरकार लैंड ऑनर से बेटरमेंट चार्ज वसूल सकती है.

लैंड वेल्‍यू टैक्‍स

सरकार द्वारा इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलप करने की वजह से यदि उस क्षेत्र में स्थित जमीन की कीमत बढ़ जाने के बावजूद यदि उसका मालिक लम्‍बे समय तक कोई निर्माण नहीं करता है तो सरकार लैंड वेल्‍यू टैक्‍स लगा सकती है.

इंपैक्‍ट फीस (डेवलपमेंट चार्ज)

जिन जगहों पर सरकार ने बड़ी इन्‍वेस्‍टमेंट की घोषणा की है उस एरिया में होने वाली नई कंस्‍ट्रक्‍शन पर इम्‍पैक्‍ट फीस लगाई जा सकती है जो डेवलपमेंट चार्ज के अलावा होगा. यह फीस लैंड ऑनर द्वारा नई कंस्‍ट्रक्‍शन परमीशन के वक्‍त ली जाएगी. फीस का निर्धारण कुल सरकारी इन्‍वेस्‍टमेंट और उससे एरिया की लैंड कॉस्‍ट में होने वाली वृद्धि के आकलन के आधार पर लगाया जाएगा.

फीस फॉर चेंजिंग लैंड यूज

यदि किसी सरकारी योजना के शुरू होने के बाद वहां लैंड यूज चेंज होता है. जैसे कि एग्रीकल्‍चर लैंड को नॉन एग्रीकल्‍चर लैंड में बदला जाता है तो लैंड ऑनर से फीस वसूली जा सकती है.

 

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