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जानें इनकम टैक्स रिफंड के फंडे और प्रोसेस

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जानें इनकम टैक्स रिफंड के फंडे और प्रोसेस

हर साल आप अपनी कमाई का कुछ हिस्सा देशहित में विकास के लिए टैक्स के रूप में जमा करते हैं. यह जमा किया गया पैसा सरकार द्वारा आपकी कमाई के कुछ हिस्से से लिया जाता है जो देश और आपके विकास एवं सुख सुविधाओं हेतु खर्च किया जाता है.

प्रतिवर्ष जब आप अपनी संपत्ति और कमाई का विवरण देते हुए इनकम टैक्स डेक्लरेशन का फॉर्म भरते हैं तो आपकी कमाई का आंकलन कर टैक्स की राशि तय की जाती है और वह आपके वेतन से काट लिया जाता है. कई बार आपके द्वारा दिए गए विवरण से ज्यादा निवेश करने पर जो अधिक पैसा जमा किया जाता है वह आपको रिफंड के माध्यम से वापस मिलता है. आपके द्वारा जमा किये गए या वापस मिलने वाले पैसों की जानकारी पाने के लिए यहां वहां भटकते रहते हैं लेकिन इसकी जानकारी प्राप्त करना अब बहुत ही आसान हो गया है. आप ऑनलाइन इस जानकारी को प्राप्त कर सकते हैं और यह जान सकते हैं की आपको कितना रिफंड मिलेगा.

यहां से प्राप्त करें जानकारी

आप इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ऑनलाइन वेबसाइट पर जाकर अपने टैक्स और रिफंड की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा टैक्स इन्फोर्मेशन नेटवर्क (TIN) की वेबसाइट में जाकर भी अपने रिफंड की स्थिति के बारे में जान सकते हैं. आप tin.tin.nsdl.com/oltas/refundstatuslogin.html इस लिंक पर जाकर अपना स्टेटस चेक कर सकते हैं. लिंक में क्लीक करते ही एक पेज खुलेगा जिसमें निचे की तरफ बताई गई जगह में आपको अपना पैन नंबर और असेसमेंट ईयर डालना होगा फिर सबमिट बटन पर क्लिक करके अपने रिफंड की राशि और अन्य जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

हेल्प डेस्क और ईमेल

आप अपने टैक्स संबंधित जानकारी हेल्प डेस्क में दिए गए कांटेक्ट नंबर और ईमेल से भी प्राप्त कर सकते हैं. इस वेबसाइट पर सभी बैंकों के हेल्प डेस्क नंबर और ईमेल आईडी दर्ज हैं. अपने संबंधित बैंक का चयन करके आप फ़ोन एवं ईमेल के माध्यम से उनसे कांटेक्ट कर जानकारी मांग सकते हैं.

इनसे मिलता है रिफंड

यदि आपने अपनी इनकम से ज्यादा निवेश कर ज्यादा रिफंड भर दिया है तो आपको इनकम टैक्स विभाग बैंक के जरिए सीधे खाते में पैसा रिफंड करता है. आपको रिफंड की राशि कभी भी नगद नहीं दी जाती है यह बैंक और विभाग की पॉलिसी के तहत होता है. इसमें रिफंड की राशि सीधे खाते में जाती है.

आरटीजीएस और एनईसीएस

रिफंड की राशि सीधे आपके बैंक खाते में जमा करने के लिए राशि का भुगतान आरटीजीएस और एनईसीएस के माध्यम से कैशलैस के रूप में किया जाता है. जिसके लिए आपको अपने खाते से जुड़ी जानकारियां जैसे अकाउंट नंबर, आईएफएससी कोड, ब्रांच कोड और एमआईसीआर कोड देना होता है. यह सारी जानकारी आपके बैंक पास बुक में निहित होती है या संबंधित बैंक से प्राप्त कर सकते हैं.

अकाउंट चेक

रिफंड का पैसा आपको चेक के माध्यम से भी प्राप्त होता है. अगर आपका खाता आपके पैन नंबर से लिंक नहीं है तो रिफंड की राशि का भुगतान चेक के माध्यम से प्राप्त होगा. आपके द्वारा दिए गए पते पर चेक भेज कर रिफंड की राशि प्रदान की जाती है.

इन्वेस्टमेंट से टैक्स देनदारी में मिलेगी राहत

सबसे पहले आपको अपने टैक्स देनदारी के बारे में जानना होगा कि आपको टैक्स देना है या नहीं. इसके लिए आप साल भर की इनकम को जोड़कर इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. वर्तमान में बजट पेश होने के बाद से टैक्स की सीमा में छुट भी दिया गया है जिससे कम आय वर्ग के लोगों को काफी फायदा होगा.

यदि आप कर्मचारी वर्ग के हैं तो आपके एम्प्लॉयर की सूचना मिलती है कि आपको दिसम्बर से जनवरी में टैक्स बचाने के लिए किए गए इन्वेस्टमेंट के बारे में अपनी कंपनी को जानकारी देना होगा. यदि आप कंपनी को इसकी सूचना या इससे जुड़े दस्तावेज पेश नहीं करते हैं तो आपका टीडीएस कटना शुरू हो जाता है. इसलिए आपको सही और पूर्ण जानकारी देना आवश्यक होता है जिससे टैक्स की सही राशि आपके वेतन से काटी जा सके. कुछ इन्वेस्टमेंट हैं जिनमें आप इन्वेस्ट करें तो टैक्स की राशि को बचा सकते हैं.

इनमें करें इन्वेस्ट

यदि आप 80सी, 80सीसी और 80सीसीडी के तहत अपना टैक्स बचाना चाहते हैं तो बच्चों की ट्यूशन फीस, ईपीएफ या जीपीएफ, पीपीएफ, जीवन बीमा पॉलिसी, हाउसिंग लोन का रीपेमेंट, फिक्स्ड डिपॉजिट, इंश्योरेंस कंपनियों के पेंशन प्लान, पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट, सीनियर सिटिजंस सेविंग स्कीम, म्यूचुअल फंड, यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान, इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड और हाउसिंग लोन रीपेमेंट में ब्याज की रकम में इन्वेस्ट कर सकते हैं. इन सभी इन्वेस्टमेंट स्कीम में इन्वेस्ट करने पर आपको डिडक्शन मिलता है जिसकी सीमा एक लाख रूपए तक होती है. यदि आपने एक लाख से अधिक का निवेश किया है तब भी आपको डिडक्शन की राशि एक लाख रूपए तक ही मिलता है.

 

Photo Credit- brimg.ne, kushinagarlive.com, i2.mail.com, taxmann.com, cache-content.credit.com, fitsnews.com,

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