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नोटबंदी के बाद भी अन्य देशों से भारत की जीडीपी ग्रोथ सबसे ज्यादा

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नोटबंदी के बाद भी अन्य देशों से भारत की जीडीपी ग्रोथ सबसे ज्यादा

नोटबंदी के बाद से कयास लगाया जा रहा था की भारत की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बिखर जाएगी. लेकिन इसके विपरीत भारत का मौजूदा ग्रोथ रेट अन्य देशों की तुलना में सबसे अधिक है. नोटबंदी के बाद से लगभग 86 प्रतिशत करंसी चलन से बाहर हो गई जिसके चलते सभी अर्थशास्त्री और एक्सपर्ट ने भारत की अर्थव्यवस्था पर सवाल उठाएं थे परन्तु इससे भारत के ग्रोथ रेट में कोई फर्क नहीं पड़ा.

अनुमानों के विपरीत आज मौजूदा फिनेंशियल ईयर में 7.1 प्रतिशत प्रोजेक्शन है. सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (CSO) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर से दिसंबर के बीच देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 7 प्रतिशत रही जबकि इसी दरमियान चीन की ग्रोथ रेट 6.8 प्रतिशत रही जो भारत के मुकाबले 0.2 प्रतिशत कम है. इस लिहाज से भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी बना हुआ है.

और बढ़ सकती है जीडीपी

अन्य एडवांस एस्टीमेट के अनुसार अक्टूबर से दिसंबर में जीडीपी ग्रोथ 7.0 फीसदी रही है जबकि वर्ष 2016-17 के लिए जीडीपी ग्रोथ 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है. अप्रैल से जून के बीच जीडीपी ग्रोथ 7.2% और जुलाई-सितंबर के बीच 7.4% रही इसके पहले इकोनॉमिस्ट और एनालिस्ट एजेंसियां 8 नवंबर को नोटबंदी के फैसले के बाद जीडीपी ग्रोथ के 7 फीसदी से नीचे आने की आशंका जता रही थीं. बता दें कि 2015-16 में जीडीपी की ग्रोथ रेट 7.6% और 2014-15 में 7.2% थी.

सीएसओ की तरफ से जारी आंकड़ों में ग्रॉस वैल्‍यू एडेड (जीवीए) के आधार पर चालू वित्‍त वर्ष के लिए बढ़त का अनुमान 6.7 फीसदी लगाया गया है. चालू वित्‍त वर्ष में आंकड़ों के अनुसार जीवीए 111.68 लाख करोड़ रुपए रहने की आशंका है जो पिछले वित्‍त वर्ष में 104.70 लाख करोड़ रुपए थी.

कृषि क्षेत्र का सपोर्ट

भारत की जीडीपी ग्रोथ को सबसे बड़ा सपोर्ट कृषि के क्षेत्र से मिला है. थर्ड क्वार्टर में इसमें 6.0% की बढ़त दर्ज की गई जबकि पिछले साल इसी क्वार्टर में ग्रोथ रेट 2.2% ही थी. जीडीपी ग्रोथ में कृषि क्षेत्र की सबसे ज्‍यादा हिस्सेदारी रही है. पूरे वर्ष में अनुमान लगाया जा रहा है कि इसमें 4.4% ग्रोथ रहेगी, जो पिछले साल 0.8% ही थी.

मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्टर पर दिखा असर

आंकड़ों के अनुसार नोटबंदी का असर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर ज्यादा हुआ है. अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 7.7% रही, जो कि पिछले साल इसी दौरान 10.6% थी. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तीसरी तिमाही में प्राइवेट सेक्टर की परफॉर्मेंस अच्छी रही है जिससे इस टर्म में 12.9% की ग्रोथ दर्ज की गई है.

सर्विस सेक्टर में मंदी

नोटबंदी के बाद प्राप्त आंकड़ों में सर्विस सेक्टर में गिरावट दर्ज की गई है. वर्ष की तिमाही में सर्विस सेक्टर में 6.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई थी लेकिन पिछले वर्ष इसी टर्म में इसकी ग्रोथ 9.4 प्रतिशत थी. मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में इस सेक्टर में ग्रोथ 7.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया जा रहा है.

एक लाख से अधिक हो सकती है प्रति व्यक्ति आय

वर्तमान की स्थिति और फाइनेंशियल ईयर को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि देश की प्रति व्यक्ति आय करीब एक लाख से अधिक जा सकती है. प्रोजेक्शन के तहत कैपिटा इनकम (प्रति व्यक्ति आय) 1,03818 रुपए रहने का अनुमान है जो पिछले वर्ष 94 हजार रूपए थी. इस तिमाही में इसमें करीब 10.2 प्रतिशत की बढ़त होगी जबकि पिछले साल यह 8.9 प्रतिशत दर्ज की गई थी. स्टैट्स के प्रोजेक्शन के मुताबिक नेशनल इनकम 134.86 लाख करोड़ रुपए रह सकती है. पिछले इकोनॉमिक ईयर में यह 120.83 लाख करोड़ रुपए थी.

Photo Credit- media.istockphoto.com, simpleinterest.in, examinationtoday.com, livemint.com, images.indianexpress.com

 

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