Connect with us

प्रॉपर्टी खरीदते समय इन टैक्सों को जरुर भरें

Property Advice

प्रॉपर्टी खरीदते समय इन टैक्सों को जरुर भरें

जब भी आप कोई प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो उससे जुड़े नियमों और टैक्स से संबंधित सभी जानकारियों का होना बहुत ही जरुरी होता है. अगर आप अपने सपनों का घर खरीद रहें हैं तो उसकी पूरी परख और जानकारी रखना आवश्यक होता है अथवा बाद में तकलीफों का सामना करना पड़ता है. प्रॉपर्टी खरीदते समय उसकी कीमत और उससे वैध तरीके से ही खरीदना समझदारी होता है.

कुछ पैसे बचाने के लिए अगर पूरी प्रक्रिया सही तरीके से नहीं की जाती तो बाद में उसका खामियाजा भुगतना पड़ता है. आप जब भी कोई प्रॉपर्टी खरीद रहें हो तो आपको राज्य और केंद्र सरकार को कुछ पैसे टैक्स के रूप में चुकाने पड़ते हैं यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो उस प्रॉपर्टी को अवैध माना जाता है. टैक्स में छुट पाने या पैसे बचाने के लिए अधिकतर बिक्री की कीमत को कम दिखाकर टैक्स कम भरा जाता है जो की अवैध तरीका है इसलिए प्रॉपर्टी खरीदते समय सभी चीजों को स्पष्ट रखना चाहिये जिससे बाद में आपको इसका फायदा मिलता है. रेजिडेंशियल या कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदते समय राज्य व केंद्र सरकार द्वारा तय  टैक्स को चुकाना अनिवार्य होता है.

रजिस्ट्रेशन टैक्स

जब भी आप कोई प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो उसका रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है. डील होने के बाद डीलर या उस प्रॉपर्टी के मालिक से रजिस्ट्रेशन कराना जरुरी होता है जिससे उस प्रॉपर्टी पर आपका मालिकाना हक़ हो जाता है. क्षेत्र के रजिस्ट्रार कार्यालय में जाकर इस प्रक्रिया को पूरा किया जाता है यह खरीदी जा रही प्रॉपर्टी का एक फीसदी हिस्सा होता है जिसे टैक्स के रूप में दिया जाता है. अलग-अलग राज्यों द्वारा रजिस्ट्रेशन फीस तय की गई है. इसके लिए आपको खरीदी या बेची जा रही प्रॉपर्टी से संबंधित सभी दस्तावेजों को उनके समक्ष प्रस्तुत करना होता है.

स्टाम्प ड्यूटी

प्रॉपर्टी की खरीद एवं बिक्री की पूरी जानकारी स्टाम्प ड्यूटी में होती है. इसमें खरीदने व बेचने वाले का नाम एवं तय कीमत के साथ-साथ सौदे की रकम भी दर्ज रहती है. इसे सेल अग्रीमेंट में लगाया जाता है जो प्रॉपर्टी डील का सबसे मुख्य कार्य होता है. स्टाम्प ड्यूटी की गणना प्रॉपर्टी की कुल कीमत, बाजार भाव या एग्रीमेंट में तय कीमत के आधार पर देना पड़ता है. अधिकांश राज्यों में स्टाम्प ड्यूटी 3 से 7 प्रतिशत होता है. राज्यों के राजस्व विभागों में प्रत्येक नगर, गाँव के मुहल्लों के लिए संपत्तियों की एक न्यूनतम मूल्यांकन सूची बना कर रखी जाती है और उस मूल्य के आधार पर स्टाम्प ड्यूटी लगानी होती है.

सर्विस टैक्स

प्रॉपर्टी खरीदते समय तय की गई राशि का कुछ हिस्सा टैक्स के रूप में हमें केंद्र सरकार को देना पड़ता है. सार्विस टैक्स प्रॉपर्टी की तय कुल कीमत का 25 प्रतिशत होता है बाकि 75 प्रतिशत को उस प्रॉपर्टी की कुल कीमत मानी जाती है. जब भी आप कोई प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो डील में तय हुई रकम का 3.75 प्रतिशत सर्विस टैक्स के रूप में जमा करना पड़ता है.

वैट टैक्स

सभी राज्यों में वैट टैक्स अलग-अलग निर्धारित की गई है. जब भी आप रेजिडेंशियल या कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो आपको राज्य सरकार द्वारा तय किये गए दर से वित टैक्स जमा करना अनिवार्य होता है. इसका निर्धारण निर्माणाधीन प्रॉपर्टी की पूरी कीमत या निर्माण के दौरान लगने वाले बिल्डिंग मटेरियल की कुल कीमत के आधार पर लगाया जाता है.

 

Photo Credit- content3.jdmagicbox.com, blog.ideafarms.com, mambizsolutions.com, 4.imimg.com, blog.ipleaders.in, essexpropertynetwork.co.uk

Comments

More in Property Advice

To Top