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प्रॉपर्टी में निवेश से पहले इन बातों का रखें विशेष ध्यान

Property Advice

प्रॉपर्टी में निवेश से पहले इन बातों का रखें विशेष ध्यान

हर किसी की चाह होती है की उसका खुद का आशियाना हो जहाँ वो अपने परिवार के साथ सुकून की जिंदगी बिताए. सर पर छत हो तो आप चैन की नींद सोते हैं और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए आश्वस्त भी रहते हैं. हर कोई घर खरीदने के लिए अपने जीवनभर की कमाई तक दांव पर लगा देते हैं. लेकिन कई बार कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान नहीं रखने से बाद में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और आपके जीवनभर की कमाई के डूबने की शंका बनी रहती है. यदि आप भी घर खरीदने या रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश करना चाहतें हैं तो इन बातों को ध्यान में रखना बहुत ही आवश्यक होता है.

प्रोजेक्ट का अप्रूव्ड लेआउट

जब भी आप घर खरीदने का विचार कर रहें हो तो सबसे पहले प्रोजेक्ट का अप्रूव्ड लेआउट जरुर देखें. इस लेआउट में बिल्डर और डेवलपर को प्रोजेक्ट में टावर, फ्लैट और मंजिल बनाने की हेतु मिली मंजूरी का सम्पूर्ण ब्यौरा होता है. साथ ही इसमें निर्माण और प्रोजेक्ट के वास्तविक स्पेस की पूर्ण जानकारी होती है जो ब्रौशर में स्पष्ट नहीं हो पाता.

जमीन का रजिस्ट्रेशन

जिस प्रोजेक्ट में आप इन्वेस्टमेंट कर रहें हैं उसके बिल्डर या डेवलपर से जमीन की रजिस्ट्री के कागजात मांगना चाहिए. इससे यह पता चल जाएगा कि जिस जमीन पर आपके मकान का निर्माण किया जा रहा है वह विवादित या किसी कानूनी वाद-विवाद में तो नहीं फंसा हैं. क्योंकि बैंक केवल उन्हीं जमीन पर लोन प्रदान करता है जिसपर कोई विवाद न हों. रजिस्ट्री की जानकारी होने से आपको होम लोन लेने में आसानी होगी और लोन भी समय पर पास हो जाएगा.

एक्सक्लेशन की जानकारी

अधिकांश डेवलपर बिल्डिंग मटेरियल के दाम में बढ़ोत्तरी का हवाला देकर प्रोजेक्ट पर एक्सक्लेशन चार्जेस लगा देते हैं. सीमेंट, सरिया, टाइल्स, रेत और अन्य कच्चे माल के दाम बढ़ने की बात कहकर फ्लैट या घर की कीमत बढ़ा देते हैं. इसलिए घर की बुकिंग कराने से पहले यह जानकारी प्राप्त करना चाहिए की फ्लैट एक्सक्लेशन फ्री है या नहीं.

लोकेशन एवं फ्लैट का विजिट

ब्रौशर में दिए गए लोकेशन एवं फ्लैट की पूरी जानकारियों का पता लगाने के लिए जिस जगह प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य चल रहा हो उस स्थान पर खुद जाकर विजिट कर पूरी जानकारी हासिल करना चाहिए. सेल्फ विजिट से आपको फ्लैट में उपयोग हो रहे बिल्डिंग मटेरियल का भी पता चल जाता है और लोकेशन से प्रमुख सुविधाएं जैसे अस्पताल, स्कूल, बाजार, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड जैसी जगहों की वास्तविक दूरी का पता चलता है.

बिल्टअप, सुपर और कारपेट एरिया की जानकारी

घर खरीदने से पहले बिल्टअप, सुपर और कारपेट एरिया को समझना जरुरी होता है. कई बार ब्रौशर में लिखे फ्लैट या घर के सुपर एरिया को आप घर का साइज़ समझ कर बुकिंग कर देते हैं जबकि फ्लैट का साइज़ उससे कम होता है. असल में कारपेट एरिया वह हिस्सा होता हैं जहाँ कारपेट बिछा सकें जिसमें फ्लैट की दीवारें शामिल नहीं होती है. यह घर के अंदर का खाली हिस्सा होता है. बिल्टअप एरिया में फ्लैट के दीवारों को शामिल करके मापा जाता है अर्थात कारपेट एरिया के साथ-साथ घर की दीवारों, कॉलम, बालकनी और पिल्लरों को शामिल किया जाता है. सुपर एरिया में प्रोजेक्ट में शामिल कॉमन एरिया को गिना जाता है. इसमें जनरेटर रूम, पार्क, जिम, स्विमिंग पूल, लॉबी, चिल्ड्रेन पार्क, टेनिस कोर्ट, प्ले ग्राउंड और कॉमन हॉल शामिल होते हैं.

पेनाल्टी क्लॉज का रखें ध्यान

वर्तमान में तय समय के अंतर्गत प्रोजेक्ट का पजेशन नहीं देने पर डेवलपर्स द्वारा ग्राहकों को पेनाल्टी देने का प्रावधान है. उसी तरह यदि आपके द्वारा भी तय तिथि में पेमेंट नहीं दिया गया हो तो बिल्डर या डेवलपर को पेनाल्टी देना पड़ता है. पेनाल्टी क्लॉज का विशेष ध्यान रखते हुए सभी जानकारियों को ध्यान में रखना जरुरी होता है.

पजेशन टाइम का ध्यान

अधिकांश बिल्डर और डेवलपर अपने प्रोजेक्ट के पजेशन में 6 महीने का ग्रेस पीरियड जोड़ देते हैं. इस स्थिति में पजेशन टाइम 6 महीने के लिए बढ़ जाता है. इस देरी को बिल्डर्स लेट प्रोजेक्ट की श्रेणी में नहीं डालते हैं और वह बायर्स को पेनाल्टी देने से बच जातें हैं. प्रोजेक्ट के पजेशन टाइम में 6 महीने का ग्रेस पीरियड जोड़ने से आप बिल्डर या डेवलपर को लेट पजेशन देने की पेनाल्टी भी चार्ज नहीं कर पाते हैं.

 

हिडन चार्जेस की जानकारी

जब भी आप घर खरीद रहें हों तो हिडन चार्जेस का ध्यान रखना चाहिए. जिस एजेंट के माध्यम से आप फ्लैट या मकान की बुकिंग करते हैं वह इन चार्जेस का जिक्र नहीं करता है. इसमें पार्किंग चार्ज, सोसायटी चार्ज और पॉवर बैकअप चार्ज शामिल रहते हैं. बुकिंग से पहले इन सब चार्जेस के बारे में पूरी जानकारी हासिल करना चाहिए.

डेवलपर की जानकारी

आप जिस प्रोजेक्ट में इन्वेस्ट कर रहें हैं उसके डेवलपर या बिल्डर के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करना जरुरी होता है. फ्लैट खरीदने से पहले उसके पुराने प्रोजेक्ट्स को जरुर देख लें और उसमें रहने वाले लोगों से भी संपर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. इससे आपको कंस्ट्रक्शन क्वालिटी, पजेशन का समय और बिल्डर के व्यव्हार के बारे में जानकारी मिल जाती है.

 

Photo Credit- cdn2.hubspot.net, peopleschoicecu.com.au, incaproject.org, drop.ndtv.com, cdn.homedit.com, blog.khojle.in, truelancer.com,  activerain-store.s3.amazonaws.com, kadvacorp.com, profiles.sulekhalive.com

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